हरिद्वार (उत्तराखंड) से शैलेंद्र कुमार की रिपोर्ट।
हरिद्वार। कोविड-19 से मुकाबला कर रहे मेडिकल स्टाफ की प्रशंसा करते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने कहा है कि दक्षिणी पूर्व एशियाई देशों में नर्सो व मिडवाइफ का कैडर दुरुस्त करने की जरूरत है। 2030 तक हेल्थ फॉर ऑल लक्ष्य पूरा करने के लिए कम से कम 19 लाख भर्तियां करने की जरूरत है। डब्ल्यूएचओ दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र की निदेशक डॉक्टर पूनम खेत्रपाल ने विश्व स्वास्थ्य दिवस के मौके पर कहा कि गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए नर्सों और मिडवाइफ की अहम भूमिका है। पूरे जीवन बच्चों के जन्म, माताओं की देखभाल, स्वास्थ्य सलाह, टीकाकरण, बुजुर्गों की देखभाल आदि में इनकी बहुत आवश्यकता होती है। सभी को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए जरूरी है कि इन नर्सों को हर तरह से अपने काम में दक्ष बनाया जाए। डब्ल्यूएचओ के स्थापना दिवस पर हर साल 7 अप्रैल को मनाए जाने वाले विश्व स्वास्थ्य दिवस की इस बार की थीम नर्स व मिडवाइफ कार्यबल को मजबूत करना है। वर्ष 2015 में डब्ल्यू एच ओ दक्षिण पूर्व एशिया ने क्षेत्र में चिकित्सा कार्यबल की कमी दूर करने और उन्हें प्रशिक्षित करने के लिए 10 साल का लक्ष्य निर्धारित किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में नर्स व मिडवाइफ को प्रशिक्षित कर उन्हें तैनात करने का काम वरीयता पर रखा गया। वर्ष 2018 तक इस क्षेत्र में 35 लाख नर्स मिडवाइफ को तैयार कर दिया गया। हर 10000 की आबादी पर 18 नर्सों व मिडवाइफ की उपलब्धता सुनिश्चित कर ली गई। जबकि 2014में नर्सों व मिडवाइफ की संख्या 29 लाख थी। इस हिसाब से तब प्रति 10000 आबादी पर इनकी उपलब्धता 16 थी। उन्होंने कहा कि इस मामले में तरक्की हुई है लेकिन अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। वैश्विक घनत्व प्रति 10000 आबादी पर 37 नर्सों का है। जब की आवश्यकता प्रति 10000 आबादी पर 40 सदस्यों की है। वर्ष 2030 तक इस क्षेत्र में 19 लाख नसों की जरूरत होगी। क्षेत्रीय निदेशक ने कहा कि कोविड-19 की वैश्विक आपदा में यह पता चल रहा है कि लोगों की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए नर्सों की कितनी जरूरत है।