अखबारों के वितरण में बाधा डालना सूचना के अधिकार का हनन है।

हरिद्वार (उत्तराखंड) से शैलेंद्र कुमार की रिपोर्ट।       


हरिद्वार। कोरोना महामारी के इस दौर में समाचार पत्र विश्वसनीय सूचना का एक अहम साधन है। इस मुश्किल घड़ी में प्रिंट मीडिया की पूरी टीम रात दिन जुटकर पूरी सावधानी का ध्यान रखते हुए लोगों तक विश्वसनीय और सही जानकारी पहुंचाने में लगी है। लेकिन लॉकडाउन के समय कई जगह लोगों तक समाचार पत्र नहीं पहुंच रहे हैं। सूचना का अधिकार व्यक्ति का मौलिक अधिकार है और समाचार पत्र व्यक्ति तक सूचनाएं पहुंचाते हैं। समाचार पत्र के व्यक्ति तक पहुंचाने में बांधा डालना इस अधिकार का हनन है। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की कोई तुलना नहीं है। अखबार में  सूचनाएं विश्वसनीय और विस्तृत होती है। इसके अलावा अखबार में क्षेत्र विशेष से संबंधित सूचनाएं होती है। जिनकी जानकारी टीवी चैनलों पर नहीं मिलती। कोरोना महामारी के दौरान समाचार पत्र सूचना का सबसे जरूरी और भरोसेमंद साधन है। इसके जरिए ही लोगों को ना सिर्फ तथ्यपरक जानकारी बल्कि सरकार की घोषणाएं और महामारी से बचाव के उपाय भी पता चलते हैं। इन सूचनाओं को प्राप्त करना व्यक्ति का मौलिक अधिकार है और इससे उसे किसी आधार पर वंचित नहीं किया जा सकता। यह आवश्यक वस्तु में आता है और इसे लोगों तक पहुंचाने में बाधा नहीं डाली जा सकती है। जब सरकार ने इस पर रोक नहीं लगाई है तो फिर  इसे लोगों तक पहुंचने से रोकना अपराध है।