हरिद्वार (उत्तराखंड) से शैलेंद्र कुमार की रिपोर्ट।
हरिद्वार। कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप का असर शुक्रवार को आस्था पर भी भारी पड़ा। गंगा आरती के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि जब बिना श्रद्धालुओं के गंगा आरती हुई है। गंगा आरती के दौरान खचाखच भरे रहने वाले हर की पौड़ी समेत सभी प्रमुख घाट वीरान पड़े थे। पुरोहितों ने ही गंगा आरती और पूजा अर्चना की। आरती में शामिल होने के लिए कोई श्रद्धालु न पहुंचे इसके लिए पुलिस सतर्क रही देश की आध्यात्मिक राजधानी कहे जाने वाले हरिद्वार में हर की पौड़ी पर हर रोज गंगा आरती में हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं। जिलाधिकारी सी रविशंकर ने बुधवार से गंगा आरती में श्रद्धालुओं के शामिल होने पर रोक लगा दी है। हरकी पौड़ी जाने वाले सभी रास्तों पर बैरिकेडिंग और रस्सी लगाकर लोगों को गंगा घाटों की तरफ जाने से रोका। शाम करीब 6:45 बजे नियत समय पर गंगा आरती हुई । गंगा सभा के पुरोहित ने ही ब्रह्मकुंड पर मां गंगा की आरती की। श्रद्धालुओं की भीड़ हर की पौड़ी नहीं पहुंची और कोई अव्यवस्था ना हो इसके लिए एसडीएम कुसुम चौहान, सिटी मजिस्ट्रेट जगदीश लाल, सी ओ सिटी अभय प्रताप सिंह, कोतवाल प्रवीण सिंह कोश्यारी, गंगा सभा के अध्यक्ष प्रदीप झा, महामंत्री तन्मय वशिष्ठ, स्वागत मंत्री सिद्धार्थ चक्रपाणि आदि नजर रखे थे। श्री गंगा नाम संकीर्तन के साथ गंगा आरती निर्धारित स्वरूप में संपन्न हुई।