देहरादून (उत्तराखंड) से गंगेश कुमार की रिपोर्ट।
देहरादून। प्रदेश में मानव गुलदार संघर्ष को कम करने के लिए प्रयोग के तौर पर राजाजी नेशनल पार्क के आसपास विलेज प्रोटेक्शन फोर्स के तहत बनाए गए। स्वयंसेवक विभाग से मानदेय मांग रहे हैं। ऐसे में किस तरह से निशुल्क स्वयं सेवक तैयार किए जाएं।यह सीखने के लिए वन विभाग के अधिकारी दोबारा से महाराष्ट्र स्थित संजय पाठक का दौरा करेंगे। प्रदेश में बीते कुछ समय से मानव वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में इजाफा हुआ है।ऐसे में इन घटनाओं को कैसे कम किया जाए इस लेकर गिव वन विभाग लगातार मंथन कर रहा है कुछ दिन पहले वन विभाग के अधिकारियों की एक दल महाराष्ट्र के संजय पार्क गया था।जहां पर अधिकारियों ने पाया कि पार्क प्रशासन ने स्थानीय लोगों को साथ में लेकर खतरे की पूर्व चेतावनी का तंत्र विकसित किया।और साधन जुटाए इस मिली जुली रणनीति का ही सबब रहा कि पार्क प्रशासन गुलदार और लोगों के बीच के संघर्ष को बहुत कम कर पाया।संजय पार्क का दौरा करने के बाद अधिकारियों ने उत्तराखंड में वन मुख्यालय को यह रिपोर्ट सौंपी थी।जिसके आधार पर वन विभाग ने राजाजी नेशनल पार्क से सटे इलाकों में विलेज प्रोटेक्शन फोर्स बनाने की योजना तैयार की इसके तहत गांव के लोगों को गुलदार की आदतों के बारे में प्रशिक्षित किया गया।इसके साथ ही उन्हें आत्मरक्षा की अन्य जरूरी जानकारी भी दी गई।प्रशिक्षित लोगों से कहा गया।कि वे और लोगों को भी जानकारी देंऔर क्षेत्र में गुलदारो की गतिविधियां पर भी निगाहें रखें खुद वन मंत्री हरक सिंह रावत ने इस योजना को महत्वपूर्ण बताया।और कहा कि यह और अन्य गांवों को भी गठित की जाएगी अब मुसीबत यह है। कि लोग बिना मानदेय के काम करने को तैयार नहीं है।संजय पार्क में अधिकारियों ने पाया था।कि लोग स्वयंसेवक के रूप में काम कर रहे हैं और प्रशिक्षण आदि से ही संतुष्ट है।अब यही सीखने के लिए वन अधिकारियों का दल संजय पार्क का दोबारा दौरा करेगा कि अपनी सुरक्षा के लिए स्थानीय लोग स्वयं सेवक के रूप में कैसे काम करने के लिए तैयार होते हैं।