शिक्षा सत्र खत्म होने को, नहीं मिल रही पुस्तकें।
देहरादून (उत्तराखंड) से गंगेश कुमार की रिपोर्ट।

 

देहरादून । प्रदेश में शिक्षा के नाम पर भले ही भारी-भरकम बजट खर्च करके उसे बेहतर करने का दावा किया जा रहा है लेकिन हकीकत यह है कि छात्रों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।हालात यह है कि सरकारी स्कूलों में आठवीं तक पढ़ने वाले 56000 छात्रों को निःशुल्क पुस्तकें अभी तक नहीं मिल पाई है जबकि वार्षिक परीक्षा की तैयारी शुरू हो गई है। बेसिक शिक्षा विभाग छात्रों को गुणवत्ता परक शिक्षा उपलब्ध कराने के दावे करता रहता है। विभाग का कहना है कि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों को नि:शुल्क ड्रेस किताबें सब कुछ समय पर मिल रहा है इन दावों के उलट स्थितियां और ही दास्तां बयां कर रही है। मार्च में वार्षिक परीक्षा होनी है। ऐसे में पूरे साल की पढ़ाई खत्म होने वाली है। सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो प्रदेश के 56000 छात्रों को अभी तक पाठ्यपुस्तक नहीं मिल सकी है। इसका कारण शासन स्तर के पुस्तक खरीदने के लिए इन छात्रों के खातों में धनराशि नहीं पहुंचना है। ऐसे में बिना किताबों के इन छात्र-छात्राएं पूरे साल पढ़ाई करके अब परीक्षा देने को तैयार है। विभाग में लापरवाही का आलम यह है।कि प्रदेश के कुछ जिलों में किताबों के लिए बजट उपलब्ध कराया गया लेकिन संबंधित जिलों के अधिकारियों की हीला हवाली के चलते बच्चों के खातों में यहधनराशि नहीं पहुँच सकी। चमोली और रुद्रप्रयाग जिले में कुछ स्थानों पर इस तरह की स्थिति सामने आई । विभागीय अधिकारियों का कहना है कि किताबों के लिए अब बजट जारी हो चुका है। जल्द ही यह धनराशि बच्चों  के खातों में भेज दी जाएगी।