अलीगढ़ से सौरभ पाठक की रिपोर्ट l अलीगढ:- नगर इगलास में सात दिवसीय बसंत पंचमी मेला चल रहा है। बसंत पंचमी मेले में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरा का आयोजन रामलीला मैदान के ग्राउंड में हुआ, कवि सम्मेलन का शुभारम्भ भाजपा विधायक राजकुमार सहयोगी ने फीता काट कर किया। शायरात का संचालन नितिन मिश्रा कवि हाथरस ने किया, व अध्यक्षता प्रो0 नवैद इलियास गुननौरी ने की।
कवि सम्मेलन में कविगण।
मुशायरा में हास्य, श्रृंगार, वीर, ओज, भक्ति रस के कविगणों ने अपनी कविता पाठ से श्रोताओं को रसतल के गोतों तक डुबो दिया। कवि सम्मेलन में पदम अल्बेला हास्य रस, शायर सावन शुक्ला, जगदीश मीणा श्रृंगार, शायर विपिन चौहान , कलीम समर तंजो-मिजाह, जितेन्द्र मित्तल कॉमेडियन, गीता गीत आदि ने कविता पाठ से रस प्रेमियों का खूब मन मोहा और पेश है मुशायरे के कुछ अंश ......गीतकार डा0 प्रशान्त देव मिश्र ने श्रृंगार का नखशिख वर्णन करते हुए पढा ’’ओ वल्लरी तू वार कर हदय की कोर-कोर पर, तू प्रेम से श्रृंगार कर शिखा से नख की डोर पर, प्रेम पुण्य प्यास है, मन भी उच्छावांस है, दावानल सी जल रही है एक एक श्वास है, प्रेम शंख फूँक लो, फूँक के यूँ झूम लो, मेरे बाहूपाश में वसुंधरा पे घूम लो, ओ वल्लरी तू वार कर हदय की कोर-कोर पर,’’ वही कवियत्री भावना भक्ति ने ब्रजभाषा में काव्य पाठ कर श्रोताओं को भक्ति रस से सराबोर किया। शायर विपिन चौहान ने अपना परिचय कुछ ऐसे दिया ’’तूफानों से आंख मिलाने वाला मंजर छूट गया, जहां किनारा मिला मुझे बस समंदर छूट गया, हम दोनों में कौन था बुज दिल, वक्त मिला तो तय होगा तूने पीठ दिखा दी, मेरे हाथ से खंजर छूट गया’’।
डा0 इल्यास नवैद गुन्नेरी ने बंदीगृहों के हालत पर यूँ कहा ’’चाहे जयवीर की हो, चाहे जहांगीर की लाश, लाश तो लाश है, हो चाहे किसी वीर की लाश, जान देकर हुई कैदी को रिहाई हासिल, कैदखाने मे पड़ी रह गयी जंजीर की लाश,’’l
ओज के कवि मनोज चौहान के स्वर ’’ सिंहों के शावक सुनो कभी स्वानों से नहीं डरा करते, कौओं के कभी कोसनें से मृग शावक नहीं मरा करते, भारत की पहुँच कहाँ तक है,शायद तुमको ये ज्ञात नहीं, सूरज से यूँ आँख मिलाना जुगनू की औकात नहीं’’ l शायर कुमार अनुपम मिश्रा ने पढा कि ’’बहते हुए गमों की रवानी से कट गये, पत्थर से लोग आखों के पानी से कट गये, ऐ भीड़ ! ऐसे रेल पर इल्जाम थोप मत, दोनों जवान दिल थे,जवानी से कट गये।
काव्य पाठ करते शायर कुमार अनुपम।
कवियत्री योगिता चौहान ने सामाजिक बुराई गर्भ भ्रुर्ण हत्या पर कविता कही कि ’’पायल की छन छन न हो, दानव संहार जरुर है, बहन बेटियां जिसने लूटी वो प्रतिकार जरुरी है, उठो सिंहघनी अब तो सो के, मस्तक धड़ से अलग करो, चूड़ी वाले कोमल हाथों मे अब तलवार जरुरी है। ’’
और किसान के दर्द को कुछ यूँ बयाँ किया "कि श्रोताओं हम तुम्हें सुनाए, गाथा एक किसान की, जिसके दम पर पलती है जनता हिन्दुस्तान की, कि आशाओं का फल लेकर, मेहनत के ताने बुनता है, खून पसीने से फसलों को सींच सींच खुश होता है, फसलों के पकने से पहले सपने लाख संजोता है l अगर सपने साकार न हो, तो इसी बात पर रोता है, सपनों के ही हेतु लगा दी बाजी जिसने जान की, जिसके ही दम पर पलती है जनता हिन्दुसतान की l’’
राजधानी दिल्ली से आयी श्रृंगार गजलकार माधुरी मुस्कान ने गजल यूँ पढी कि ’’फूलों सा अहसास तुम्हारी चाहत में, जीवन है मधु मास तुम्हारी चाहत में, जबसे दिल पर इश्क हुकूमत कर बैठा, सब कुछ लगता खास तुम्हारी चाहत में, दीवाना-सा दुनिया में फिरता मुस्कान, एक लड़का बिंदास तुम्हारी चाहत में l
काव्य पाठ करती श्रृंगार गजलकार माधुरी मुस्कान।
कवि सम्मेलन में मेला कमेटी के अध्यक्ष नितिन अग्रवाल, नगर पंचायत अध्यक्ष भोला नम्बरदार, योगेन्द्र सिंह ठैनुआ, गौरव शर्मा, पीयूष शर्मा, कुलदीप पाठक, कवि सम्मेलन संयोजक कमेटी के संरक्षक डा0 सियाराम वर्मा, महामंत्री गोपाल गुरु, कोषाध्यक्ष कुमार अनुपम, प्रबंधक राजू बेधडक, अध्यक्ष सतीश मधुवन, सहित सैकडों श्रोतागण शमिल रहे।